प्रेमचंद की सूक्तियाँ
प्रेमचंद की सूक्तियाँ
'अन्याय-अन्याय ही है चाहे एक आदमी करे या सारी जाति करे दूसरों के भय से किसी पर अन्याय नहीं करना चाहिए।'...सेवासदन
'रिश्वत का पैसा देह फुला देता है।'...प्रेमाश्रम
'कृषि प्रधान देश में खेती केवल जीविका का साधन नहीं है वह सम्मान की वस्तु भी है।' ...कर्मभूमि
'जब दूसरों के पाँव तले अपनी गर्दन दबी हुई है तब उन पाँवों को सहलाने में ही कुशल है।' ...गोदान
'विद्यासे और कुछ नहीं होता तो दूसरों का धन ऐंठना आ जाता है मूर्ख होने से तो अपना धन गवाना पड़ता है।' ...प्रेमाश्रम
सोये हुए मनुष्य की अपेक्षा जागते हुए मनुष्य को जगाना कठिन है। ... सेवासदन
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