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Showing posts from January, 2025

क़िस्सा डायरी से- हरिवंश राय बच्चन

"जिस चीज ने मुझे सबसे अधिक दुखी किया वह थी मेरे प्रति अविश्वास की भावना। यदि मेरे प्रति कहीं भी संदेह था तो मुझे विदेश आने ही नहीं देना था। हालाँकि आँखों के नीचे रहकर भी किसी के मन पर पहरा नहीं दिया जा सकता है।" जब हरिवंश राय बच्चन कैंब्रिज पढ़ने गए थे तब उन्होंने अपनी 'प्रवास डायरी' लिखी। इस डायरी में इंग्लैंड और कैंब्रिज की विस्तृत चर्चा पढ़ने को मिलती है। लेकिन उन्होंने कहीं-कहीं अपने निजी जीवन के अनुभवों को भी दर्ज किया है। बच्चन साहब की पत्नी कार्य के साथ भारत में अपने बच्चों का पाला-पोषण भी कर रही थीं। लेकिन इन्हें अपने पति हरिवंश राय बच्चन पर हमेशा हमेशा शक बना रहता था। जिससे बच्चन साहब खासकर परेशान रहते थे। उपर्युक्त उद्धरण इसी मनःस्थिति में लिखा गया है।

क़िस्सा डायरी से- कृष्ण बलदेव वैद

'और मैं दो बूढ़े वैरागियों की तरह जीते चले जा रहे हैं। फ़र्क़ हम दोनों में यह है कि इस वैराग्य में भी व्यावहारिकता में उसकी दक्षता में कोई कमी नहीं होती, लेकिन मैं हमेशा इसमें अदक्ष रहा हूँ और अब और हो गया हूँ।'    यह उद्धरण हिंदी साहित्य के संजीदा अफ़साना निगार कृष्ण बलदेव वैद्य की डायरी से लिया गया है। इन्होंने अपनी डायरी में मानवीय और निजी संबंधों की बहुत सूक्ष्म अभिव्यक्ति की है। इस उद्धरण में उन्होंने अपनी पत्नी चम्पा के स्थायी और अनवरत नवीन प्रेम की व्यंजना की है। लेकिन लेखक यह भी स्वीकार करता है कि वह इस नैपुण्य में अदक्ष है। डायरी में इस तरह के अनेक वाक़या पढ़ने को मिल जाते हैं,  जिसके द्वारा पाठक को लेखक की निजी और अनसुनी आवाज़ को भी सुना जा सकता है।

प्रेमचंद की सूक्तियाँ

प्रेमचंद की सूक्तियाँ   'अन्याय-अन्याय ही है चाहे एक आदमी करे या सारी जाति करे दूसरों के भय से किसी पर अन्याय नहीं करना चाहिए।' ...सेवासदन   'रिश्वत का पैसा देह फुला देता है।' ...प्रेमाश्रम   'कृषि प्रधान देश में खेती केवल जीविका का साधन नहीं है वह सम्मान की वस्तु भी है।'  ...कर्मभूमि 'जब दूसरों के पाँव तले अपनी गर्दन दबी हुई है तब उन पाँवों को सहलाने में ही कुशल है।' ...गोदान   'विद्यासे और कुछ नहीं होता तो दूसरों का धन ऐंठना आ जाता है मूर्ख होने से तो अपना धन गवाना पड़ता है।' ...प्रेमाश्रम  सोये हुए मनुष्य की अपेक्षा जागते हुए मनुष्य को जगाना कठिन है। ...  सेवासदन

डायरियों में प्रेम

डायरियों में प्रेम 'पुरुष-पुरुष में बहुत घनिष्ठता हो जाती है- लेकिन वास्तविक घनिष्ठता एक पुरुष और एक स्त्री में ही संभव है क्योंकि  Emotion की सही परिणति शारीरिक उपलब्धि में ही जाकर होती है।'---- मोहन राकेश  हर व्यक्ति भरा-पूरा मार्केट है। उसमें से तुम वह लो, जो तुम्हारे लिए सुंदर और उपयोगी है, और जिसे लेने की सामर्थ्य तुममे है, और जिसे चुराना या छीनना या याचना से लेना नहीं होगा। ---- मोहन राकेश